ताक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश, मौत कैसे रूके?
हिरासत में मौत एक सार्वभौमिक समस्या है और इसे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के बाद उल्लंघन का सबसे क्रूर रूप माना गया है।
ताक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश, मौत कैसे रूके? जारी >
हिरासत में मौत एक सार्वभौमिक समस्या है और इसे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के बाद उल्लंघन का सबसे क्रूर रूप माना गया है।
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केवल सत्ता परिवर्तन या उपद्रव की तीव्रता काफी नहीं; ज़रूरत है कि इस चेतना को संस्थागत रूप देने की।
नेपाल का जेन ज़ी विद्रोह: अगर संविधान को मजबूत कर दे… जारी >
अजय सोडानी ने तो पूरा वृत्तांत इतनी खूबसूरती, इतनी तल्लीनता से लिखा है कि पाठक भी उनका सहयात्री बन उसी लम्हें में जीने लगता है। मेरे साथ भी यही हुआ। किताब पढ़ते-पढ़ते सहसा महसूस हुआ कि ‘एक था जाँस्कर’ की रचना प्रक्रिया जाननी चाहिए। इस सवाल से आरंभ हुआ एक रोचक संवाद।
‘एक था जाँस्कर’… वो भी तो कभी देख जो मंज़र में नहीं है जारी >
शहर की इस आर्थिक तंगी और एकाकी जीवनशैली के बीच, सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म पर कुछ नए ट्रेंड तेजी से उभर रहे हैं। ऐसा ही एक रिश्ता है होबोसेक्सुअलिटी।
होबोसेक्सुअलिटी: महंगी सिटी में रहने की जुगाड़! जारी >
धर्म और राजनीति को मिलाना खतरनाक है। इस्लाम भी कहता है कि किसी पर धर्म थोपना गुनाह है। नीतीश कुमार का टोपी न पहनना उनका व्यक्तिगत अधिकार है। इसे चुनावी हथियार बनाना न तो बिहार के मुसलमानों के हित में है और न ही लोकतंत्र के लिए सही संदेश है।
मुख्यमंत्री को मुस्लिम टोपी पहनाने की कोशिश क्यों हुई? जारी >
हमारे विनम्र अभिमत में भगवान श्रीकृष्ण के प्रादुर्भाव से लेकर उनके चरित्र और लीलाओं पर किसी अलग ढंग से विचार करना ना तो समीचीन कहा जाएगा और ना ही उचित।
सोचिए, माखन चोर नाम में क्या रखा है? जारी >
‘महिलाएं क्या कर सकती हैं?’ से आगे हमें यह देखना होगा कि हम उनके बारे में अपनी सोच को कितना बदल सकते हैं और उनके साथ कितना समतापूर्ण व्यवहार कर सकते हैं।
‘हार्ड डिस्क के बारे में बात करनी है? किसी मेल कलीग को फोन दीजिए’ जारी >
पति-पत्नी का रोज एकसाथ सोना जहां पश्चिमी अवधारणा थी उसी तरह ‘स्लीप डिवोर्स’ या ‘स्लीप एलायंस’ भी पश्चिमी अवधारणा है।
स्लीप डिवोर्स: अलग बिस्तर, रिश्ते बेहतर जारी >
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पिछले कार्यकाल में जिस तरह विपक्षी सांसदों पर सख्ती दिखाते थे, वैसा इस बार देखने को नहीं मिल रहा है। जहां पहले निष्कासन का डर था, वहीं अब केवल समझाने-बुझाने की कोशिश होती है।
आखिर क्यों बदले बदले से ओम बिरला नजर आते हैं… जारी >
समाजवादी पार्टी जैसी जनता-आधारित पार्टी को ऐसे नेताओं से नुकसान ही होता है, जो समाजवाद की विचारधारा से मेल नहीं खाते।
गर इतनी शिकायत है तो घर क्यों नहीं जाते… जारी >