हिट विकेट कमलनाथ, अब चलो, चलो…

इस पूरे घटनाक्रम का हासिल यह है कि कमलनाथ ‘हिट विकेट’ हो गए हैं। कुशल राजनेता खुद अपने ही खेमे में गोल कर बैठे। बीजेपी में उनका जाना रूक गया मतलब फिलहाल बीजेपी नेतृत्‍व ने उन्‍हें हाथोंहाथ नहीं लिया है। और, इधर कांग्रेस में वे संदिग्‍ध हो गए।

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एक दूजे के लिए: एक खूबसूरत मौसम की याद

‘एक दूजे के लिए’ उस ज़माने की फ़िल्म थी जब प्रेम होते ही प्रेमीजन बिस्तर पर कूद नहीं जाते थे। प्रेम का मतलब तब रोमांस ही होता था,’लव मेकिंग’ नहीं। कुछ झिझक बाक़ी थी। उदारीकरण आठ दस साल और दूर था।

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सिर पर सवार समोसा

सभी फोटो: गिरीश शर्मा आज समोसे की कथा जानिये। समोसा जिसे कोई तिकोना कहता है, कोई चमोचा भी। तिकाने आकारा का यह दक्षिण एशिया का एक लोकप्रिय व्यंजन है। यह कचौरी और आलूबड़े की बिरादरी का समान रूप से चर्चित

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मोदी सरकार यानी देश में राम राज

लोकसभा चुनाव 2024 के ठीक पहले दिल्‍ली में भाजपा का राष्‍ट्रीय अधिवेशन आयोजित हो रहा है। दो दिनी अधिवेशन के पहले दिन 17 फरवरी को पारित राजनीतिक प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि मोदी सरकार के 10

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और कमलनाथ हो जाएंगे कमल के

भाजपा के राष्‍ट्रीय अधिवेशन में पीएम मोदी ने कहा है कि इस बार लोकसभा चुनाव में 370 से ज्‍यादा सीटें जीतनी है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रत्‍याशी व्‍यक्ति नहीं पार्टी निशान कमल होगा। इस बीच कांग्रेस के झंडाबरदार रहे कमलनाथ

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ये दोस्‍ती हम तोड़ेंगे…50 साल बाद अब क्‍या?

शोले फिल्‍म का गाना है, ये दोस्‍ती हम नहीं तोड़ेंगे… मगर एमपी की राजनीति के दो दोस्‍तों की दोस्‍ती 50 साल बाद टूटने जा रही है। हम बात कर रहे हैं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की। कमलनाथ के कांग्रेस छोड़

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महाराष्‍ट्र में परिवार की लड़ाई सड़क से बूथ तक

महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार की लड़ाई पहले घर से सड़क पर आई और अब सड़क से बूथ पर आने के आसार बन गए है। पूरी संभावना है कि परिवार का साथ छोड़ कर गए अजित पवार बारामती से

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आपातकाल, एक खत और सरकारी नौकरी पर संकट

प्रख्‍यात हिंदी भाषाविद, लेखक और रतलाम महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. जयकुमार जलज का बीते दिनों देहांत हुआ। उनके कृतित्‍व को नमन करते हुए उनके ही द्वारा बताई गई घटना यहां प्रस्‍तुत है। आपातकाल के दौरान की यह घटना वास्‍तव में मूल्‍यों के प्रति आस्‍था और जीवन का सटीक उदाहरण है।

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बाबरौ बनाइ कै बैरागी कहलावत हैं

आशु चौधरी वृषभानु की लली देखऐसो चढ्यो राग-रंगमोरपंख धारी योंटेढ़े मुसक्यावत हैंललिता-विशाखा कूं दैचकमा भये यों चम्पतअकेली कर श्यामा जू केचरण पखरावत हैंअसीम लीला करत श्यामभनक न नैकूं दैकेरसिकन कूं बीच ठौरटेढो नचावत हैंराखत हैं दूरी परदूर राखत रागन तेबाबरौ

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