Kavita Shukla

भंवरताल में आखिरी रात है, पता नहीं कब आना होगा…

लोग सोचते हैं कि मेरा कितना कुछ छूट रहा है, परंतु मुझे लगता है कि मैं कितना कुछ पा रहा हूं, अर्जित कर रहा हूं। जिस तरह से सबका स्नेह मिल रहा है उससे जो खोया है, वह तो मायने ही नहीं रखता।

भंवरताल में आखिरी रात है, पता नहीं कब आना होगा… जारी >

अपने गांव भंवरताल में हूं; एक वो दिवाली थी, एक ये दिवाली है, एकदम अलग

सब कुछ छोड़ देने की संकल्पना के बावजूद ऐसा बहुत कुछ हम सबके पास होता है, जो कभी भी छूटता नहीं। शायद यही अपनापन और जुड़ाव हमें हमेशा जीवंत भी बनाए रखता है।

अपने गांव भंवरताल में हूं; एक वो दिवाली थी, एक ये दिवाली है, एकदम अलग जारी >

महिला मुद्दों की जिम्मेदार रिपोर्टिंग जरूरी

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने मीडिया समूहों से आग्रह किया कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को संवेदनशील ढंग से देखें और उनकी जिम्मेदार रिपोर्टिंग करें।

महिला मुद्दों की जिम्मेदार रिपोर्टिंग जरूरी जारी >

पूरे पच्चीस साल बाद पैदल अपने गांव भंवरताल जा रहा हूं…

झाबुआ से धार आते हुए मैं सोच रहा था कि लगातार विरोधाभासी रहवासी परिस्थितियों में रह पाना कितना सार्थक हो पाएगा। जब तक आगे के कार्य की स्पष्टता तक यह चलाया जा सकता है।

पूरे पच्चीस साल बाद पैदल अपने गांव भंवरताल जा रहा हूं… जारी >

55 की उम्र में एवरेस्ट फतहः प्रामाणिक होकर ही छू सकते हैं शिखर….

आज बातें अदम्य साहस और संकल्प की धनी एक अज़ीम शख्सियत विदुषी ज्योति रात्रे की, जो पर्वतारोहण के रिकार्ड के पन्नों पर एक स्वर्णाक्षर हैं।

55 की उम्र में एवरेस्ट फतहः प्रामाणिक होकर ही छू सकते हैं शिखर…. जारी >

दहेज का दबाव न हो तो हर मर्द चार-पांच ब्याह कर लेगा

मैंने स्पष्ट किया कि धर्म और धर्म जागरण की जो आप लोगों की समझ है उसे लेकर आप में और मुझमें गंभीर मतभेद हैं जो आगे चलकर और गहरे हो सकते हैं।

दहेज का दबाव न हो तो हर मर्द चार-पांच ब्याह कर लेगा जारी >

संभवतः किसी को उम्मीद नहीं होगी कि मैं इस तरह फट पडूंगा…

मैंने स्पष्ट किया कि धर्म और धर्म जागरण की जो आप लोगों की समझ है उसे लेकर आप में और मुझमें गंभीर मतभेद हैं जो आगे चलकर और गहरे हो सकते हैं।

संभवतः किसी को उम्मीद नहीं होगी कि मैं इस तरह फट पडूंगा… जारी >

मैं सन् उन्नीस सौ बावन में सातवीं फेल हुआ हूं…

उस जीप में कम से कम 30 लोग तो रहे ही होंगे। यह समझ नहीं आ रहा था कि ड्राइवर अंदर है या बाहर? वह आगे देख कैसे पा रहा होगा?

मैं सन् उन्नीस सौ बावन में सातवीं फेल हुआ हूं… जारी >

मैं बाबा नहीं बन पाया…मैं हार गया!

मैंने कई तरह की अपनी शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक सीमाओं को तोड़ा। तार्किकता को एकतरफ रख मैंने परस्पर विश्वास के सहारे जीवन जीने की कोशिश की।

मैं बाबा नहीं बन पाया…मैं हार गया! जारी >

ब्रज जा कर जाना, श्रद्धा से किस तरह आनंदित रहा जा सकता है

समझ में आ गया साधु और भिखारी में यही अंतर है। वैसे हम दोनों ही बिना टिकट हैं। पर हम से होने वाला व्यवहार एकदम अलग-अलग है।

ब्रज जा कर जाना, श्रद्धा से किस तरह आनंदित रहा जा सकता है जारी >