Kavita Shukla

निगाहे-मस्त ने ठुकरा दिया ज़माने को…

इस शेर को अगर तसव्वुफ़ के रंग में रंगा हुआ समझा जाए तो यह एक नए ज़ाविए की तरफ़ ले जाता है। यहां सुबु, जाम , ख़ुम और मयखाना इश्तियारे की तरह इस्तेमाल किए गए हैं।

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जो जितने ज्‍यादा दिन ‘ठहरेगा’, उतना ज्‍यादा बिल देना पड़ेगा

श्री महाकालेश्वर के दर्शन हेतु शारीरिक एवं मानसिक मजबूती दोनों जरूरी है क्योंकि ये वही देव हैं जो अपने ही शादी में रानी मैनावती की परिक्षा लेने में भी पीछे नहीं रहे।

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जहां से शुरु हुआ था संदेशों का सफर, जहां फहराया पहली बार तिरंगा

भोपाल की यह विरासत को सरकार की नजरे इनायत दरकार है, क्योंकि यह शर्म की नहीं, गर्व की विरासत है, क्योंकि सबसे पहले यहीं ब्रिटिश यूनियन जैक को हटा कर तिरंगा फहराया गया था।

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मात खा रहे शिव ने कुछ ऐसा किया कि स्‍तब्‍ध रह गई पार्वती

शिव ने कोई भी ऐसा काम नहीं किया जिसका औचित्य उस काम से ही न ठहराया जा सके। आदमी की जानकारी में वह इस तरह के अकेले प्राणी हैं जिनके काम का औचित्य अपने-आप में था।

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इश्क़, इंक़लाब और फ़ैज़

फ़ैज़ जिस दौर में रच रहे थे तब दुनिया फासीवाद, नाजीवाद और पूंजीवाद की तिहरी मार झेल रही थी। इन तमाम परिदृश्यों ने उनकी पहले से सचेत सामाजिक नागरिक समझ को वंचित और मजलूम तबकों के साथ अधिक गहराई से जोड़ दिया।

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मेरे अहसासों का इकबाल मैदान, जम्हूरियत और शाहीन जिसकी शान

मेरे लिए यह सिर्फ एक मैदान नहीं है। इसी मैदान ने यह अहसास कराया कि कोई सावर्जनिक स्थल सत्ता से सवाल पूछने और सबको इंसाफ मिले, बराबरी का दर्जा मिले, इसकी खोज के मंच भी हो सकते हैं।

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सिनेमाई क्रूरता के इस दौर में कला से ही उम्मीद: प्रो. गोहिल

भारतीय सिनेमा की यात्रा पर संवाद का आयोजन हुआ। इस अवसर पर दो सशक्त और समकालीन विषयों पर आधारित फिल्मों ‘प्यास’ और ‘ग्वावा– ए मॉब लिंचिंग’ का प्रदर्शन किया गया।

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बिना गोलियों का युद्ध और वैश्विक शांति की तलाश

शांति को केवल युद्ध की अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा सकता। आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक समावेशन और संस्थागत विश्वसनीयता भी शांति के अनिवार्य तत्व हैं।

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मैं भंवर में तैरने का हौसला रखने लगा…

जीवन हमेशा अपने भीतर के हौसलों और इच्छाशक्ति के बल पर ही जिया जाता है। जो लोग किसी के सहारे जिंदगी गुज़ारते हैं वे कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते।

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गुरुजी…कोमल गौरैया कुंज में श्‍वान की आक्रामकता

मैं गुरुजी के रचना संसार में खोया था। तभी एक सवाल से मेरी तंद्रा टूटी। उप्‍पल सर ने मुझसे पूछा कि क्‍या आप कभी गुरुजी से मिले हैं?

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