बाल कविता: बसंत आता है कब?
छुटकी चहकी,फिर से बोली/ बसंत आता है कब? कब?/ दीदी ने भी की ठिठोली,फूल खिलते हैं तब…
बाल कविता: बसंत आता है कब? जारी >
छुटकी चहकी,फिर से बोली/ बसंत आता है कब? कब?/ दीदी ने भी की ठिठोली,फूल खिलते हैं तब…
बाल कविता: बसंत आता है कब? जारी >
एलॉन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने एक व्यक्ति के दिमाग में ‘ब्रेन-रीडिंग’ डिवाइस प्रत्यारोपित की है। शारीरिक रूप से असमर्थ लोग,लकवाग्रस्त लोग इस चिप की मदद से सिर्फ सोच कर ही अपने कम्प्यूटर का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह तो है इस चिप का घोषित मकसद। पर हकीकत क्या है?
दिमाग में चिप: सबसे बड़ा बिजनेस मैन सिर्फ परोपकार करेगा? जारी >
मोदी सिर्फ अपने मुद्दे और रणनीति ही तय नही करते बल्कि वे विपक्ष के मुद्दों को भी अपना हथियार बना लेते हैं। वे जैसे चाहे विपक्ष को उनकी पिच पर खेलने के लिए मजबूर कर देते हैं और यदि विपक्ष उसकी पिच पर लाने की कोशिश करता है तो उसे अपनी बनाकर मैदान को बिखेर देते है।
मोदी ‘रंग’ के आगे कितना टिकेगा भंग विपक्ष? जारी >
आज आपको अपने संग सैर करवाती हूं मुरैना जिले के सिहोनिया कस्बे में स्थित ‘ककनमठ मंदिर’ की, जो भुरभुरी रेतीली मिट्टी वाले खेतों के बीच खड़ा इतराता है। यह मंदिर अपनी अचरज भरी विशिष्टता के कारण देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
कभी सही गिन नहींं पाएंगे इस मंदिर के स्तंभ जारी >
अगर यह कहूं कि यह फिल्म सिनेमा की भाषा में लिखी गई कविता है तो यह बहुत सतही टिप्पणी होगी। आसान सी। ऐसा लगेगा कि उस कवित्त तक पहुंचा ही नहीं जो सिनेमा में रचा गया है।
लव ऑल: जिंदगी की कोर्ट पर अपना मैच जारी >
मालवा के परिचय का एक चेहरा यहां की बोली की मिठास और आहार के स्वाद का है। मालवा का अपना खास स्वाद है। पड़ोसी राज्य गुजरात और राजस्थान का सिग्नेचर फूड भी मालवा में आ कर यहां का स्वाद पा कर इठला गया है।
स्वाद आस्वाद: गुजरात के ढोकलों से अलग है मालवा के ढोकले जारी >
अं, अ: की खूब है जोड़ी/ चलो भई चलो कुछ पढ़ें लिखें /बड़े चलें भई बड़े चलें।
बाल कविता: अलबेली बारहखड़ी जारी >
शांतिलाल जैन, प्रख्यात व्यंग्यकार ‘‘यह सबसे अच्छा समय था, यह सबसे खराब समय था।’’ इन पंक्तियों के लेखक ब्रिटिश उपन्यासकार चार्ल्स डिकन्स कभी भारत आए थे या नहीं मुझे पक्के से पता नहीं, मगर पक्का-पक्का अनुमान लगा सकता हूं कि
सबसे अच्छा समय, सबसे खराब समय जारी >
सरकारी सर्वे के दौरान महिलाओं से बात करने के लिए घर आंगन में कुछ देर बैठना हो जाता था। ऐसे ही सर्वे में एकबार सुवासरा के मीणा मोहल्ले में जाना यादगार अनुभव बन गया।
गली-मोहल्ले में यूं मिल जाता है इनोवेशन जारी >
कभी लगता कि ऐसा होता उसके एक किरदार का नाम मेरा होता। मैं कभी उसके संग समंदर की लहरों में छलांगें लगाता, कभी गोद में उसकी सर रख, सो ही जाता। क्या भरोसा वो सो जाती कभी मेरी तहों में जैसे खो जाते है दो जिस्म चादर की सिलवटों में। क्या जाने, क्या होता। वो मेरी होती, मैं उसका होता।
जिंदगी क्या है? किताब पढ़ कर जाना जारी >